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शुभ मुहूर्त

 

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Monday 18 December 2017
ज्योतिष शास्त्र काल शास्त्र है । शुभ मुहूर्त में प्रारम्भ किया गया कार्य निर्विघ्न रूप से शीघ्र ही सम्पन्न होता है । उसमें किसी प्रकार का कोई विघ्न नहीं पड़ता है ।
 
 

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weekMondayTuesdayWednesdayThursdayFridaySaturdaySunday
48
27 November
4:36PM··· रवि योग
28 Nov
··· रवि योग
5:20PM··· सिद्धि योग
5:20PM··· सर्वार्थसिद्धि योग
29 Nov
···6:58AM सिद्धि योग
···6:58AM सर्वार्थसिद्धि योग
···5:11PM रवि योग
30 Nov
6:59AM··· सर्वार्थसिद्धि योग
1 December
···2:27PM सर्वार्थसिद्धि योग
2:27PM··· रवि योग
2 Dec
···12:06PM रवि योग
11:57PM··· रवि योग
3 Dec
···9:20AM रवि योग
49
4 Dec
7:02AM··· सर्वार्थसिद्धि योग
7:02AM··· अमृतसिद्धि योग
5 Dec
···3:19AM सर्वार्थसिद्धि योग
···3:19AM अमृतसिद्धि योग
6 Dec
7 Dec
7:05AM सर्वार्थसिद्धि योग
7:05AM अमृतसिद्धि योग
7:05AM गुरुपुष्यामृत्त योग
8 Dec
6:27PM··· रवि योग
9 Dec
···5:40PM रवि योग
10 Dec
5:34PM··· सर्वार्थसिद्धि योग
50
11 Dec
···7:07AM सर्वार्थसिद्धि योग
12 Dec
13 Dec
14 Dec
15 Dec
16 Dec
17 Dec
51
18 Dec
12:00PM··· ज्वालामुखी योग
19 Dec
···10:08AM ज्वालामुखी योग
20 Dec
21 Dec
4:17PM··· रवि योग
22 Dec
···7:10PM रवि योग
7:14AM सर्वार्थसिद्धि योग
23 Dec
9:42PM··· रवि योग
24 Dec
···11:45PM रवि योग
52
25 Dec
1:54AM त्रिपुष्कर योग
26 Dec
7:16AM··· सिद्धि योग
7:16AM··· सर्वार्थसिद्धि योग
27 Dec
···1:46AM सिद्धि योग
···1:46AM सर्वार्थसिद्धि योग
1:46AM··· रवि योग
28 Dec
··· रवि योग
7:17AM··· सर्वार्थसिद्धि योग
29 Dec
···12:37AM सर्वार्थसिद्धि योग
···12:36AM रवि योग
5:10AM रवि योग
30 Dec
7:18AM त्रिपुष्कर योग
8:37PM··· सर्वार्थसिद्धि योग
8:37PM··· अमृतसिद्धि योग
31 Dec
···7:18AM सर्वार्थसिद्धि योग
···7:18AM अमृतसिद्धि योग
5:53PM··· रवि योग

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सर्वार्थसिद्धि, अमृतसिद्धि, गुरुपुष्यामृत और रविपुष्यामृत योग
शुभ मुहूर्तों में स्वर्ण आभूषण, कीमती वस्त्र आदि खरीदना, पहनना, वाहन खरीदना, यात्रा आरम्भ करना, मुकद्दमा दायर करना, ग्रह शान्त्यर्थ रत्न धारण करना, किसी परीक्षा प्रतियोगिता या नौकरी के लिए आवेदन-पत्र भरना आदि शुभ मुहूर्त जानने के किए अब आपको पूछने के लिए किसी ज्योतिषी के पास बार-बार जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी । सर्वार्थसिद्धि, अमृतसिद्धि, गुरुपुष्यामृत और रविपुष्यामृत योग वारों का विषेश नक्षत्रों से सम्पर्क होने से ये योग बनते हैं । जैसे कि इन योगों के नामों से स्पष्‍ट है, इन योगों के समय में कोई भी शु्भ कार्य आरम्भ किया जाय तो वह निर्विघ्न रूप से पूर्ण होगा ऐसा हमारे पूर्वाचार्यों ने कहा है ।

यात्रा, गृह प्रवेश, नूतन कार्यारम्भ आदि सभी कार्यों के लिए या अन्य किसी अपरिहार्य कारणवश यदि व्यतिपात, वैधृति, गुरु-शुक्रास्त, अधिक मास एवं वेध आदि का विचार सम्भव न हो तो सर्वार्थसिद्धि आदि योगों का आश्रय लेना चाहिये ।

अमृतसिद्धि योग
अमृतसिद्धि योग रवि को हस्त, सोम को मृगशिर, मंगल को अश्‍विनी, बुध को अनुराधा, गुरु को पुष्य नक्षत्र का सम्बन्ध होने पर रविपुष्यामृत-गुरुपुष्यामृत नामक योग बन जाता है जो कि अत्यन्‍त शुभ माना गया है ।

रवियोग योग
रवियोग भी इन्हीं योगों की भाँति सभी कार्यों के लिए हैं . शास्त्रों में कथन है कि जिस तरह हिमालय का हिम सूर्य के उगले पर गल जाता है और सैकड़ों हाथियों के समूहों को अकेला सिंह भगा देता है उसी तरह से रवियोग भी सभी अशुभ योगों को भगा देता है, अर्थात्‌ इस योग में सभी कार्य निर्विघन रूप से पूर्ण होंगे ।

त्रिपुष्कर और द्विपुष्कर योग
त्रिपुष्कर और द्विपुष्कर योग विषेश बहुमूल्य वस्तुओं की खरीददारी करने के लिए हैं . इन योगों में खरीदी गई वस्तु नाम अनुसार भविष्य में दिगुनी व तिगुनी हो जाती है । अतः इन योगों में बहुमूल्य वस्तु खरीदनी चाहिये । इन योगों के रहते कोई वस्तु बेचनी नहीं चाहिये क्योंकि भविष्य में वस्तु दुगुनी या तिगुनी बेचनी पड़ सकती है । धन या अन्य सम्पत्ति के संचय के लिए ये योग अद्वितीय माने गए हैं । इन योगों के रहते कोई वस्तु गुम हो जाये तो भविष्य में दुगुना या तिगुना नुकसान हो सकता है, अतः इस दिन सावधान रहना चाहिए । इस दिन मुकद्दमा दायर नहीं करना चाहिए और दवा भी नहीं खरीदनी चाहिए ।






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