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शुभ मुहूर्त

 

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Tuesday 28 April 2015
ज्योतिष शास्त्र काल शास्त्र है । शुभ मुहूर्त में प्रारम्भ किया गया कार्य निर्विघ्न रूप से शीघ्र ही सम्पन्न होता है । उसमें किसी प्रकार का कोई विघ्न नहीं पड़ता है ।
 
 

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weekMondayTuesdayWednesdayThursdayFridaySaturdaySunday
14
30 March
···8:44AM सर्वार्थसिद्धि योग
···6:18AM रविपुष्यामृत्त योग
···8:44AM रवि योग
31 Mar
6:16AM सर्वार्थसिद्धि योग
1 April
2 Apr
5:50PM··· रवि योग
3 Apr
···8:48PM रवि योग
4 Apr
5 Apr
7:33PM··· द्विपुष्कर योग
15
6 Apr
···1:59AM द्विपुष्कर योग
7 Apr
8 Apr
6:07AM··· सर्वार्थसिद्धि योग
6:07AM··· अमृतसिद्धि योग
9 Apr
···6:09AM सर्वार्थसिद्धि योग
···6:06AM अमृतसिद्धि योग
10 Apr
7:27AM··· रवि योग
11 Apr
···7:34AM रवि योग
12 Apr
7:08AM··· सर्वार्थसिद्धि योग
16
13 Apr
···6:01AM सर्वार्थसिद्धि योग
6:12AM··· सिद्धि योग
6:12AM··· सर्वार्थसिद्धि योग
14 Apr
···4:45AM सिद्धि योग
···4:45AM सर्वार्थसिद्धि योग
15 Apr
16 Apr
17 Apr
7:48PM··· सर्वार्थसिद्धि योग
7:48PM··· अमृतसिद्धि योग
18 Apr
···5:56AM सर्वार्थसिद्धि योग
···5:56AM अमृतसिद्धि योग
19 Apr
5:55AM सर्वार्थसिद्धि योग
17
20 Apr
21 Apr
5:53AM सर्वार्थसिद्धि योग
12:00PM··· रवि योग
22 Apr
···11:20AM रवि योग
5:52AM··· सर्वार्थसिद्धि योग
23 Apr
···5:51AM सर्वार्थसिद्धि योग
11:20AM··· रवि योग
24 Apr
···12:08PM रवि योग
12:08PM··· सर्वार्थसिद्धि योग
25 Apr
···5:49AM सर्वार्थसिद्धि योग
5:49AM त्रिपुष्कर योग
26 Apr
5:48AM सर्वार्थसिद्धि योग
5:48AM रविपुष्यामृत्त योग
4:22PM··· रवि योग
18
27 Apr
··· रवि योग
28 Apr
··· रवि योग
29 Apr
··· रवि योग
30 Apr
···12:45AM रवि योग
1 May
2 May
6:26AM··· रवि योग
3 May
···8:41AM रवि योग

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सर्वार्थसिद्धि, अमृतसिद्धि, गुरुपुष्यामृत और रविपुष्यामृत योग
शुभ मुहूर्तों में स्वर्ण आभूषण, कीमती वस्त्र आदि खरीदना, पहनना, वाहन खरीदना, यात्रा आरम्भ करना, मुकद्दमा दायर करना, ग्रह शान्त्यर्थ रत्न धारण करना, किसी परीक्षा प्रतियोगिता या नौकरी के लिए आवेदन-पत्र भरना आदि शुभ मुहूर्त जानने के किए अब आपको पूछने के लिए किसी ज्योतिषी के पास बार-बार जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी । सर्वार्थसिद्धि, अमृतसिद्धि, गुरुपुष्यामृत और रविपुष्यामृत योग वारों का विषेश नक्षत्रों से सम्पर्क होने से ये योग बनते हैं । जैसे कि इन योगों के नामों से स्पष्‍ट है, इन योगों के समय में कोई भी शु्भ कार्य आरम्भ किया जाय तो वह निर्विघ्न रूप से पूर्ण होगा ऐसा हमारे पूर्वाचार्यों ने कहा है ।

यात्रा, गृह प्रवेश, नूतन कार्यारम्भ आदि सभी कार्यों के लिए या अन्य किसी अपरिहार्य कारणवश यदि व्यतिपात, वैधृति, गुरु-शुक्रास्त, अधिक मास एवं वेध आदि का विचार सम्भव न हो तो सर्वार्थसिद्धि आदि योगों का आश्रय लेना चाहिये ।

अमृतसिद्धि योग
अमृतसिद्धि योग रवि को हस्त, सोम को मृगशिर, मंगल को अश्‍विनी, बुध को अनुराधा, गुरु को पुष्य नक्षत्र का सम्बन्ध होने पर रविपुष्यामृत-गुरुपुष्यामृत नामक योग बन जाता है जो कि अत्यन्‍त शुभ माना गया है ।

रवियोग योग
रवियोग भी इन्हीं योगों की भाँति सभी कार्यों के लिए हैं . शास्त्रों में कथन है कि जिस तरह हिमालय का हिम सूर्य के उगले पर गल जाता है और सैकड़ों हाथियों के समूहों को अकेला सिंह भगा देता है उसी तरह से रवियोग भी सभी अशुभ योगों को भगा देता है, अर्थात्‌ इस योग में सभी कार्य निर्विघन रूप से पूर्ण होंगे ।

त्रिपुष्कर और द्विपुष्कर योग
त्रिपुष्कर और द्विपुष्कर योग विषेश बहुमूल्य वस्तुओं की खरीददारी करने के लिए हैं . इन योगों में खरीदी गई वस्तु नाम अनुसार भविष्य में दिगुनी व तिगुनी हो जाती है । अतः इन योगों में बहुमूल्य वस्तु खरीदनी चाहिये । इन योगों के रहते कोई वस्तु बेचनी नहीं चाहिये क्योंकि भविष्य में वस्तु दुगुनी या तिगुनी बेचनी पड़ सकती है । धन या अन्य सम्पत्ति के संचय के लिए ये योग अद्वितीय माने गए हैं । इन योगों के रहते कोई वस्तु गुम हो जाये तो भविष्य में दुगुना या तिगुना नुकसान हो सकता है, अतः इस दिन सावधान रहना चाहिए । इस दिन मुकद्दमा दायर नहीं करना चाहिए और दवा भी नहीं खरीदनी चाहिए ।






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